भारत में एलपीजी संकट: हॉर्मूज़ की बंदशारी और घरों की चिंता

कच्चे रसोई गैस सिलेंडर आज कई घरों में दुर्लभ हो गए हैं। भारत सरकार के अनुसार, हॉर्मूज़ का जलांथ को मिले हुए हमलों के बाद बंद होने से देश में एलपीजी आपूर्ति में भारी ठसे पड़ गया है। इस खबर ने सीधे लगभग 33 करोड़ भारतीय घरों को प्रभावित किया है, जो अब अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए घबराए हुए हैं। यहाँ बात यह है कि इस संकट केवल एक अस्थायी लंबी लाइन या बुकिंग डिले नहीं, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा की कमियों को नंगा कर रहा है।

संकट का इतिहास और पृष्ठभूमि

यह स्थिति यूएस और इजरायली सैन्य हमलेईरान क्षेत्र के तुरंत बाद शुरू हुई थी। जब ईरान और अन्य देशों के बीच स्थित हॉर्मूज़ का जलांथ बंद हुआ, तो वहां से गुजरने वाले तेल और गैस की आपूर्ति पर तुरंत असर पड़ा। सामान्य रूप से वैश्विक तरल तेल की लगभग 20 प्रतिशत और ग्लोबल एलपीजी का बड़ा हिस्सा यहीं से जाता है। भारत की अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा होता है, जिसमें से 90 प्रतिशत इसी रास्ते आता है। इसलिए, जब मार्च की शुरुआत हुई, तो हफ्ते भर में एलपीजी का प्रवाह रातोंरात 30 प्रतिशत घट गया। पेट्रोलियम मंत्री हार्दीप सिंह पुरी, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि यह हॉर्मूज़ का पहला ऐतिहासिक बंद होना है।

सरकार की तात्कालिक कार्रवाई और नियम

असामाजिक व्यवस्था रोکنे के लिए सरकार ने तेजी से कदम उठाए। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 8 मार्च, 2026 को 'एलपीजी नियंत्रण आदेश' जारी किया। इस आदेश के तहत सभी रिफाइनों को अधिकतम एलपीजी उत्पादन करने को कह दिया गया था। खास तौर पर सी-थ्री और सी-फोर हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स को प्राथमिकता दी गई ताकि घरेलू खाना पकाने के लिए गैस उपलब्ध हो सके। इसके अलावा, महत्वपूर्ण वस्तु अधिनियम को भी लागू किया गया ताकि दलालों को रोक सका जा सके। तीन मुख्य तेल विपणन कंपनियां—भारतीय पेट्रोलियम निगम लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्थान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने एक साथ 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत दिल्ली में ₹60 बढ़ाकर ₹913 कर दी।

बाजार में अहंकार और आम जनता का सहयोग

बाजार में अहंकार और आम जनता का सहयोग

असली मुश्किल तब आई जब आम लोगों में भगदड़ मच गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 14 मार्च, 2026 को दैनिक बुकिंग औसतन 55.7 लाख से बढ़कर 88.8 लाख हो गई। यह 'भयभीत खरीददारी' का परिणाम था, न कि किसी वास्तविक पूर्ण आपूर्ति विफलता का। मंत्रालय के अधिकारी सुजाता शर्मा, संयुक्त सचिव (विपणन) ने बताया कि ऑनलाइन बुकिंग 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है। फिर भी, डिस्पंचर पर लाइंग लंबी रही। कुछ राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, गोवा और केरल में सिलेंडरों का छापामारी भी हुआ, जहां से 15,000 सिलेंडर जब्त किए गए। शहरी इलाकों में बुकिंग के लिए 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन का अंतराल रख दिया गया।

भविष्य की दिशा और संरचनात्मक बदलाव

भविष्य की दिशा और संरचनात्मक बदलाव

इस संकट ने एक सवाल उठा दिया है कि क्या देश अपने ही ध्यान से ऊर्जा सुरक्षा बना सकता है। सरकार अब पाइप्ड नेचरल गैस (पीएनजी) को बढ़ावा दे रही है। राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे सिलेंडर वालों को पीएनजी में बदलने के लिए 24 घंटे में अनुमति दें। इसका मतलब है कि भविष्य में शहरों में सिंडेन्स की जगह पाइपलाइन गैस आएगी। हालांकि, तुरंत समस्या यह है कि भारत के पास रणनीतिक एलपीजी भंडारण क्षमता बहुत कम है। यदि हॉर्मूज़ फिर से खुल भी जाए, तो देश को अपनी आयात नीति पुनर्विचार करनी होगी क्योंकि वर्तमान व्यवस्था बहुत नाजुक साबित हुई है।

Frequently Asked Questions

एलपीजी की कमी क्यों हुई?

मुख्य कारण हॉर्मूज़ जलांथ का बंद होना था, जहाँ से भारत का 90 प्रतिशत गैस आयात होता है। फीनिक्स युद्ध की स्थिति ने टैंकरों को रुका दिया और प्रवास पर 500 प्रतिशत बीमा प्रीमियम लगा, जिससे आपूर्ति धीमी हुई।

क्या सिलेंडर की कीमत बढ़ेगी?

सभी तीनों ओएमसी ने पहले ही ₹60 कीमत बढ़ाई है। भविष्य में कीमतें बाजार की स्थिति पर निर्भर करेंगी, लेकिन सरकार ने सब्सिडी वाले परिवारों की तुलना में व्यावसायिक उपयोग पर अधिक नजर रखी है।

बुकिंग में विलंब कब तक रहेगा?

शहरी इलाकों में 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन के अंतराल को अनिवार्य माना गया है। हालांकि, मंत्री ने कहा है कि औसत डिलीवरी समय अभी भी 2.5 दिन ही बना रहना चाहिए।

सरकार क्या कड़ी कार्रवाई ले रही है?

सरकार महत्वपूर्ण वस्तु अधिनियम लागू कर रही है और रिफाइनों को अधिकतम उत्पादन का आदेश दिया है। साथ ही, ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए डेलिवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) को बढ़ाकर 90 प्रतिशत ग्राहकों तक फैलाया जा रहा है।