ईद-उल-अधा कब है और क्यों खास है?

ईद-उल-अधा मुस्लिम कैलेंडर की पाँचवीं महीने ज़ुहल-हिज्ज़ा के दसवें दिन मनाई जाती है। यह त्यौहार हज़रत इब्राहिम (अली) की कौरबानी को याद दिलाता है, जब उन्होंने अपने बेटे इस्माइल को भगवान की आज्ञा पर बलिदान करने का इरादा दिखाया था। इस घटना को स्मरण करने के लिए मुसलमान दया और सहनशीलता का संदेश देते हैं।

ईद-उल-अधा की तैयारियां कैसे शुरू करें?

पहले दिन घर में सफ़ाई से शुरुआत करें। दरवाज़े‑खिड़कियों को साफ़ रखें, ताकि मेहमानों को स्वागत करने में कोई दिक्कत न हो। साथ ही, जूते और कपड़ों की धुलाई भी इस समय करवा दें, क्योंकि कई लोग नए कपड़े पहनकर ईद मनाते हैं।

खाने‑पीने की तैयारी में सबसे अहम चीज़ है हलाल मांस या बकरी का सादा स्ट्यू। यदि आप शाकाहारी हैं तो दाल‑भात और सब्जी के साथ इफ़्तार में फलों की सलाद रख सकते हैं। मीठे में खीर, शबूजी और बरफी लोकप्रिय विकल्प होते हैं।

ईद-उल-अधा के खास रिवाज़ और परम्पराएँ

सुबह-सुबह मस्जिद में इक़बाल (इफ़्तार) की नमाज़ पढ़ी जाती है, फिर ज़कैफ़ा (दान) दी जाती है। कई परिवार सुबह ही कुर्बान करने जाते हैं, जहाँ बकरी या भेड़ को हलाल तरीके से काटा जाता है और माँस को गरीबों में बाँटा जाता है। यह दया का सबसे बड़ा पहलू है।

घर वापस आकर सब मिलकर बड़े थाले पर तैयार किए गए खाने का आनंद लेते हैं। बच्चों को नई मिठाइयाँ, जैसे जलेबी या सैंफेदे की डाली, दी जाती हैं। इस दिन रिश्तेदारों के साथ मिलना‑जुलना और ग़िफ़्ट्स देना भी आम बात है।

यदि आप ईद-उल-अधा को सोशल मीडिया पर साझा करना चाहते हैं तो छोटे वीडियो या तस्वीरें ले सकते हैं, लेकिन याद रखें कि यह दिन आध्यात्मिकता का भी है, इसलिए फ़ोटो से ज़्यादा दान‑धर्म और प्रार्थना पर ध्यान दें।

सारांश में, ईद-उल-अधा सिर्फ़ एक त्यौहार नहीं बल्कि मानवीय मूल्यों को याद दिलाता है—इमान, बलिदान और सहानुभूति। सही समय, साफ़-सफ़ाई, हलाल भोजन और दान‑धर्म इसे खास बनाते हैं। इस साल भी इन आसान कदमों से आप अपने परिवार के साथ एक सच्ची ख़ुशी का अनुभव कर सकते हैं।

ईद-उल-अधा 2024: बकरीद के मौके पर शुभकामनाएं, संदेश और बधाई दें