अयोध्या में मत्स्य और बत्तख पालन का निरीक्षण, सूर्य प्रताप शाही ने दी एकीकृत खेती की सलाह

जब सूर्य प्रताप शाही, कृषि मंत्री of उत्तर प्रदेश सरकार ने जून 2026 के अंत में अयोध्या का दौरा किया, तो यह सिर्फ एक औपचारिक निरीक्षण नहीं था। यह किसानों की आय दोगुनी करने के लिए एक ठोस रणनीति का हिस्सा था। मंत्री ने आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज में मत्स्य पालन और बत्तख पालन इकाइयों का गहन अवलोकन किया। उनका संदेश स्पष्ट था: सिर्फ फसल उगाएं नहीं, बल्कि अपने खेत को एक व्यापारिक हब बनाएं।

यह बात तब और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब हम देखते हैं कि कैसे सरकारी नीतियां अब 'एकीकृत खेती' (Integrated Farming) की ओर झुक रही हैं। यानी एक ही खेत में धान, सब्जी, मछली और पशुपालन—सब कुछ। इससे किसान मौसम या बाजार की उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रह सकता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये योजनाएं जमीन पर असरदार साबित हो रही हैं?

मंत्री का निरीक्षण: सिर्फ देखना नहीं, समझना

24 जून 2026 को मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थित मत्स्य पालन और बत्तख पालन इकाइयों का निरीक्षण किया। वहां चल रही गतिविधियों की समीक्षा करते हुए उन्होंने तकनीकी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया। अगले दिन, 25 जून की सुबह, उन्होंने विश्वविद्यालय के अन्य अनुसंधान केंद्रों का भी दौरा किया।

दोपहर 3:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक, वहां "खेत बचाने अभियान" का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्रालय और केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह भी शामिल थे। यह एक दुर्लभ अवसर था जब राज्य और केंद्र दोनों स्तर के अधिकारी एक ही छत के नीचे बैठकर किसानों की समस्याओं पर चर्चा कर रहे थे।

एकीकृत खेती: कम खर्च, ज्यादा मुनाफा

कार्यक्रम के दौरान सबसे रोचक चर्चा 'एकीकृत खेती' के फायदों पर हुई। मंत्री ने किसानों को समझाया कि कैसे वे एक ही खेत में अनाज, फल, सब्जी, पशुपालन, मछली पालन और बकरी पालन को जोड़ सकते हैं।

  • मछली पालन: खेतों में पानी भरने के दौरान मछली पालने से अतिरिक्त आय होती है।
  • बत्तख पालन: बत्तखें खेत में कीट-पतंग खाती हैं, जिससे कीटनाशकों का उपयोग कम होता है।
  • खाद निर्माण: पशु और मछली की विष्ठा से प्राकृतिक खाद बनती है, जो मिट्टी की उपजाऊवता बढ़ाती है।

मंत्री ने कहा, "यह सिर्फ खेती नहीं, यह व्यवसाय है। जब आप कई स्रोतों से आय कमाते हैं, तो आप जोखिम से सुरक्षित रहते हैं।" यह दृष्टिकोण उन किसानों के लिए बहुत उपयोगी है जो केवल धान या गेहूं पर निर्भर हैं और बाजार की कीमतों में उतार-चढ़ाव से घिर जाते हैं।

विश्वविद्यालय की भूमिका और वैज्ञानिक सहयोग

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय केवल शिक्षा देने वाला संस्थान नहीं है, यह अनुसंधान का केंद्र भी है। वहां कार्यरत वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिनायक प्रताप शाही, वरिष्ठ वैज्ञानिक of कृषि विज्ञान केंद्र, कुमारगंज ने बताया कि कैसे नई तकनीकों को किसानों तक पहुंचाया जा रहा है।

पिछले साल, जुलाई 2025 में, मंत्री शाही ने यहीं धान की नई किस्म 'NDR 20/65' की लाइन सोइंग (Line Sowing) तकनीक का निरीक्षण किया था। यह तकनीक बीज बचाती है और उपज बढ़ाती है। अब मत्स्य और पक्षी पालन को जोड़कर यह दिखाया जा रहा है कि कैसे एक खेत से तीन-चार गुना ज्यादा लाभ कमाया जा सकता है।

भविष्य की राह: खरीफ 2026 और आगे

भविष्य की राह: खरीफ 2026 और आगे

25 जून को आयोजित 'राष्ट्रीय समूह बैठक खरीफ 2026' में वैज्ञानिकों और किसानों ने मिलकर आने वाले मानसून के लिए योजनाएं तैयार कीं। चूंकि उत्तर प्रदेश में बारिश की अनिश्चितता बढ़ी है, इसलिए ऐसे तरीके अपनाने जरूरी हैं जो पानी की कमी या अधिकता दोनों में काम आएँ।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने हाल ही में हवाई सर्वेक्षण के जरिए फसल क्षति का आकलन भी किया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार अब डेटा-ड्रिवन निर्णय ले रही है। चाहे वह विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला हो या खेत का किनारा, हर जगह वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।

Frequently Asked Questions

एकीकृत खेती (Integrated Farming) क्या है और इसका किसानों को क्या फायदा है?

एकीकृत खेती वह प्रक्रिया है जिसमें एक ही खेत में अनाज, सब्जी, फल, पशुपालन, मत्स्य पालन आदि को एक साथ जोड़ा जाता है। इसका मुख्य फायदा यह है कि किसान की आय के कई स्रोत बन जाते हैं। यदि किसी फसल की पैदावार कम होती है, तो पशु या मछली पालन से होने वाली आय उसे पूरा कर लेती है। इसके अलावा, एक इकाई का कचचा दूसरे की खाद बन जाता है, जिससे लागत कम होती है।

आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय, अयोध्या में किन नई तकनीकों पर काम हो रहा है?

विश्वविद्यालय वर्तमान में धान की उन्नत किस्म 'NDR 20/65' की लाइन सोइंग तकनीक, मत्स्य पालन की आधुनिक विधियों और बत्तख पालन के माध्यम से कीट नियंत्रण पर काम कर रहा है। डॉ. बिनायक प्रताप शाही जैसे वैज्ञानिक इन तकनीकों को स्थानीय किसानों के लिए अनुकूलित कर रहे हैं ताकि वे कम लागत में अधिक उपज प्राप्त कर सकें।

मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अयोध्या में मखाना खेती का निरीक्षण क्यों किया?

अयोध्या क्षेत्र मखाना (Fox Nuts) उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। सितंबर 2025 में मंत्री ने इसकी खेती का निरीक्षण किया था क्योंकि मखाना की खेती में अच्छी आय होती है और यह जल-उपज वाले क्षेत्रों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है। इससे किसानों को धान की तुलना में बेहतर मुनाफा मिल सकता है और यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देता है।

खरीफ 2026 के लिए किसानों को क्या सलाह दी गई है?

राष्ट्रीय समूह बैठक में किसानों को सलाह दी गई कि वे केवल एक फसल पर निर्भर न रहें। उन्हें मत्स्य पालन और पशुपालन को अपनी खेती का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही, वेटरनरी और मत्स्य विभागों द्वारा प्रदान किए गए सब्सिडी वाले योजनाओं का लाभ उठाने और नई बीज किस्मों का उपयोग करने पर जोर दिया गया।