जगन्नाथ रथ यात्रा ओडिशा राज्य की सबसे बड़ी धार्मिक प्रक्रिया में से एक है। हर साल लाखों लोग पुरी के जगन्नाथ मंदिर में इस रंगीन मेला को देख आते हैं। अगर आप पहली बार जा रहे हैं तो थोड़ा पहले से जानकारी रख लेना फायदेमंद रहेगा।
रथ यात्रा की शुरुआत प्राचीन काल से है, लेकिन आज के रूप में इसे 16वीं सदी में व्यवस्थित किया गया माना जाता है। रथ तीन मुख्य देवता – जगन्नाथ, मालिका और बद्रिनी को ले जाता है। हर साल यह रथ एक महीने तक चलता है और अलग‑अलग गली से गुजरते हुए अंत में समुद्र तट पर उतराया जाता है। इस दिन लोग ‘आरती’ सुनते हैं और स्नान कर समुद्र के पानी में भगवान को अर्पित करते हैं।
2025 में रथ यात्रा का पहला दिन 14 जून से शुरू होगा और अंतिम दिन 15 जुलाई तक चलेगा। सबसे बड़ी रथ 13 मीटर ऊँची, 12 टन वजन वाली है और इसे आठ घोड़ों की खींचतान पर चलाया जाता है। यदि आप भीड़ वाले समय में नहीं जाना चाहते तो मध्य‑सप्ताह के दिनों को चुन सकते हैं, क्योंकि शनिवार‑रविवार सबसे अधिक भीड़ लाते हैं।
आवागमन का सबसे आसान तरीका रेल या बस से पुरी तक पहुंचना है। स्टेशन से मंदिर तक लगभग 3 किलोमीटर की दूरी है, जो ऑटो‑रिक्शा या स्थानीय टैक्सी से कवर हो जाती है। अगर आप पहले रात ही रुकते हैं तो होटल बुकिंग जल्दी कर लेनी चाहिए, क्योंकि इस समय में कमरों का दाम काफी बढ़ जाता है।
भोजन के मामले में मंदिर परिसर के पास कई स्टॉल होते हैं जहाँ प्रसाद और स्थानीय खाने की चीजें मिलती हैं। लेकिन ध्यान रखें कि बहुत मसालेदार या भारी भोजन से बचें – रथ यात्रा में लंबे समय तक खड़े रहना पड़ता है, इसलिए हल्का स्नैक बेहतर रहेगा।
सुरक्षा के लिहाज़ से भी कुछ बातों का ख़याल रखें। अपने सामान को हमेशा आँखों के सामने रखें और बड़ी भीड़ में मोबाइल या कीमती चीजें दिखाने से बचें। यदि आप परिवार साथ ले जा रहे हैं तो बच्चों को हाथ पकड़े रखेँ, क्योंकि कभी‑कभी रथ तेज़ी से चलती है और रास्ता संकरी हो जाता है।
रथ यात्रा के दौरान कई धार्मिक कार्यक्रम होते हैं – जैसे ‘जगन्नाथ अभिषेक’, ‘मालिका अर्पण’ आदि। इन कार्यक्रमों को देखने के लिए पहले से टाइम‑टेबल देख लेना फायदेमंद रहता है, ताकि आप अपने पसंदीदा अनुष्ठान को मिस न करें।
आखिर में, अगर आप यात्रा के बाद पुरी की और सैर करना चाहते हैं तो समुद्र तट पर सूर्यास्त देखना बहुत अच्छा रहेगा। यहाँ का ‘सूर्यकान्त’ बाजार भी घूमने लायक है जहाँ से आप शिल्पकारी चीज़ें खरीद सकते हैं।
संक्षेप में, जगन्नाथ रथ यात्रा सिर्फ एक धार्मिक इवेंट नहीं बल्कि ओडिशा की संस्कृति और लोगों की मेहमाननवाज़ी का जश्न है। थोड़ी तैयारी के साथ आप इस यात्रा को यादगार बना सकते हैं। तैयार हो जाइए, अपने बैग पैक करें और इस अद्भुत अनुभव को जीने आएँ!
जगन्नाथ रथ यात्रा उत्सव पुरी, भारत में हर साल हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ महीने की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस साल, यह त्योहार 53 वर्षों में एक बार होने वाले एक दुर्लभ खगोलीय संरेखण के कारण विशेष है। यह उत्सव जगन्नाथ मंदिर से गुंडीचा मंदिर तक भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के वार्षिक यात्रा को चिन्हित करता है।