हर हिन्दु का मानना है कि पूजा‑पाठ में समय बहुत असर डालता है। अगर हम सही मुहूरत पर पूजा करें तो मन की शांति और परिणाम दोनों बढ़ जाते हैं। लेकिन कई बार लोग घड़ी देख कर या सिर्फ़ इंटरनेट से जानकारी लेकर उलझन में पड़ते हैं। इस लेख में मैं आपको सरल तरीके बताऊँगा जिससे आप बिना किसी जटिल गणना के अपना पूजा समय तय कर सकें।
सबसे पहले देखें कि आपका स्थानीय पंचांग या मोबाइल ऐप कौन‑सी तिथि पर “अशु वैध” या “सुबाह” दिखा रहा है। ये शब्द अक्सर सूर्योदय, दोपहर और सूर्यास्त के समय को दर्शाते हैं। आम तौर पर सुबह 6 बजे से 9 बजे तक का समय ‘भोर’ माना जाता है – यही सबसे पवित्र समय है क्योंकि इस दौरान प्रकृति की ऊर्जा साफ‑सुथरी रहती है।
दोपहर में दोपहर के 12:00 बजे से 1:30 बजे तक ‘मध्याह्न’ का समय होता है, जो शक्ति को बढ़ाता है। अगर आप स्नान या शुद्धिकरण रीतियों की पूजा कर रहे हैं तो यह अच्छा विकल्प बनता है। शाम 4 बजे से 6 बजे के बीच ‘संध्या’ माना जाता है; इस समय घर में दीप जलाना और व्रत रखना बहुत फायदेमंद रहता है।
समय का चयन सिर्फ़ आदर्श नहीं, बल्कि व्यावहारिक होना चाहिए। यदि आप काम या स्कूल के कारण सुबह जल्दी नहीं उठ पाते, तो दोपहर के बाद 2‑3 बजे एक छोटा पूजा कर सकते हैं। बस यह याद रखें कि इस दौरान आपका मन शांत और शरीर साफ हो।
एक आसान तरीका है – अपने मोबाइल में रिमाइंडर सेट करें। जैसे ही घंटी बजे, आप थोड़ी देर शांति से बैठें, जलते दीप को देखें और भगवान का नाम जपें। यह छोटा सा अभ्यास आपके दिन की तनावपूर्ण स्थिति को कम कर देगा और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाएगा।
पूजा के बाद हमेशा स्वच्छता पर ध्यान दें। हाथ‑धोना, पवित्र वस्त्र पहनना और अलंकृत थाली में फल‑फूल रखना रिवाजों को पूरा करता है। यदि आप घर में नहीं हैं तो छोटे पोर्टेबल पूजा सेट जैसे ‘पावभज’ या ‘दीपक’ ले जा सकते हैं। इससे कहीं दूर भी आप अपनी आध्यात्मिक आदतें नहीं छोड़ेंगे।
ध्यान रखें कि हर दिन का एक ही समय चुनना जरूरी नहीं, बल्कि लगातार दो‑तीन विकल्पों में से वही लेना जो आपके शेड्यूल के अनुकूल हो। ऐसा करने से पूजा का असर निरंतर बना रहेगा और आप मानसिक शांति भी महसूस करेंगे।
आखिरकार, सही पूजा समय वह है जब आपका दिल शांत हो और मन में सकारात्मक सोच रहे। ऊपर बताये गये सरल कदमों को अपनाकर आप बिना जटिल गणना के ही अपने जीवन में आध्यात्मिक संतुलन बना सकते हैं। तो आज से एक बार अपनी दैनिक रूटीन में इन छोटे‑छोटे बदलाव लाएँ, और देखें कैसे आपके मन की शांति बढ़ती है।
करवा चौथ एक महत्वपूर्ण हिन्दू त्यौहार है जिसे कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस अवसर पर विवाहित महिलाएं अपने पतियों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए दिनभर उपवास रखती हैं। इस वर्ष करवा चौथ 2024 में 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। उपवास सूर्योदय से शुरू होकर चंद्रोदय तक होता है।